My Expressions

Date : 22 April 2020

  • Young Voice
  • अपर्णा शर्मा


धरती ने आदमी से कहा सुन तू मेरी सुन
इंसान बनाया था तुझे बन गया  तू  घुन
तूने सुखा दिया मेरे आंचल।  का  समंदर
पी जाएगी तुझे ही अपनी प्यास से तो डर
दम घुट रहा है सांस अब घुटने लगी मेरी
रहने दे बहुत  देख  ली  इंसानियत  तेरी      
अब प्यार की सद्भाव की चादर तो नई बुन


बेकार ही रह जाएंगे  जो यंत्र  हैं तेरे
तुझको ही निगल जाएंगे जो मंत्र हैं तेरे
खुद को संवारने के कई तंत्र हैं मेरे
कोरोना की तरह और भी तो मंत्र है मेरे
अब रोज सुनाऊंगी तुझे एक नई धुन
धरती ने आदमी से कहा सुन तू मेरी सुन

      
परिंदों की तरह प्यार से रहता नहीं है क्यू
दरख़्तों की तरह छांव तू देता नहीं है क्यूं
जज़्बात के अल्फ़ाज़ पिरोता नहीं  है  क्यूं
मेरी तरह बरसात में रोता नहीं है  क्यूं
सब खो दिए जो मैंने दिए थे तुझे वो गुण
धरती ने आदमी से कहा सुन तू मेरी सुन      
इंसान बनाया था तुझे बन गया  तू  घुन


जागो कि जगाती है ये धरती तुझे मानव
जागो कि बहुत देर ना हो जाए ऐ मानव
जागो कि तुझ पे हंस रहा विनाश का दानव
जागो कि नव विहान के वाहक हो तुम मान
धरती ने आदमी से कहा सुन तू मेरी सुन
धरती के दिल से गूंजते संगीत को तू सुन

 

अपर्णा शर्मा

हिंदी अध्यापिका, डी.एल.डी.ए.वी. मॉडल स्कूल शालीमार बाग, दिल्ली, दिल्ली